Adhyāya 111 (Book 6): Daśama-dina-saṃgrāma—Bhīṣma’s Counsel to Yudhiṣṭhira and the Śikhaṇḍin-Led Advance
अहमावारयिष्यामि वेलेव मकरालयम् । “मैं द्रोणाचार्य, द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, कृपाचार्य, दुर्योधन, चित्रसेन, विकर्ण, सिन्धुराज जयद्रथ, अवन्तीके राजकुमार विन्द-अनुविन्द, काम्बोजराज सुदक्षिण, शूरवीर भगदत्त, महाबली मगधराज, सोमदत्तपुत्र भूरिश्रवा, राक्षस अलम्बुष तथा त्रिगर्तराज सुशर्माको रणक्षेत्रमें सब महारथियोंके साथ उसी प्रकार रोक रखूँगा, जैसे तटभूमि समुद्रको आगे बढ़ने नहीं देती है । ५७--५९ ई ।। कुरूंश्व॒ सहितान् सर्वान् युध्यमानान् महाबलान् | निवारयिष्यामि रणे साधयस्व पितामहम्,'युद्धमें एक साथ लगे हुए समस्त महाबली कौरवोंको भी मैं युद्धस्थलमें आगे बढ़नेसे रोक दूँगा। तुम पितामह भीष्मके वधका कार्य सिद्ध करो”
sañjaya uvāca | aham āvārayiṣyāmi veleva makarālayam | kurūṃś ca sahitān sarvān yudhyamānān mahābalān | nivārayiṣyāmi raṇe sādhayasva pitāmaham ||
संजय म्हणाला—जसा तट मकरालय समुद्राला रोखतो, तसा मी त्यांना रोखून धरीन. एकत्र युद्ध करणाऱ्या सर्व महाबली कौरवांनाही मी रणांगणात पुढे सरकू देणार नाही. तू पितामह भीष्माविषयीचे कार्य साध्य कर.
संजय उवाच