Yuga-Lakṣaṇa and Varṣa-Pramāṇa Inquiry (युगलक्षण–वर्षप्रमाण–प्रश्न)
परिवार्य तु कौरव्य दैर्घ्य हस्वत्वमेव च । जम्बूद्वीपेन संख्यातस्तस्य मध्ये महाद्रुम:,वह उस द्वीपकी लंबाई और चौड़ाई सबको घेरकर खड़ा है। महाराज! उसके बीचमें शाक नामक एक बड़ा भारी वृक्ष है, जो जम्बूद्वीपके समान ही विशाल है। महाराज! वहाँकी प्रजा सदा उस शाकवृक्षके ही आश्रित रहती है। वहाँ बड़े पवित्र जनपद हैं। उस द्वीपमें भगवान् शंकरकी आराधना की जाती है
parivārya tu kauravya dīrghya-hasvatvam eva ca | jambūdvīpena saṅkhyātas tasya madhye mahādrumaḥ ||
हे कौरव्या! त्या द्वीपाची लांबी-रुंदी जणू सर्व बाजूंनी वेढून तो स्थित आहे; आणि त्याचे परिमाण जंबूद्वीपाच्या मानाने सांगितले आहे. त्याच्या मध्यभागी एक महान वृक्ष आहे.
संजय उवाच