भीष्म-पर्व अध्याय १०० — त्रिगर्त-आक्रमण, भीष्म-केन्द्रित पुनर्संयोजन, तथा शक्त्यस्त्र-विनिमय
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्म॑ प्रति दुर्योधनवाक्ये सप्तनवतितमो<ध्याय:
iti śrīmahābhārate bhīṣmaparvaṇi bhīṣmavadhaparvaṇi bhīṣmaṃ prati duryodhanavākye saptanavatitamo 'dhyāyaḥ
इति श्रीमहाभारताच्या भीष्मपर्वातील भीष्मवधपर्वात, भीष्मांप्रति दुर्योधनवाक्य नामक सत्त्याण्णवावा अध्याय समाप्त।
कर्ण उवाच