भीष्म-पर्व अध्याय १०० — त्रिगर्त-आक्रमण, भीष्म-केन्द्रित पुनर्संयोजन, तथा शक्त्यस्त्र-विनिमय
निष्पपात ततस्तूर्ण पुत्रस्तव विशाम्पते । सहितो भ्रातृभिस्तैस्तु देवैरिव शतक्रतु:,प्रजानाथ! तदनन्तर आपका पुत्र दुर्योधन तुरंत ही अपने भाइयोंके साथ शिविरसे बाहर निकला, मानो देवताओंके साथ इन्द्र अपने भवनसे बाहर आये हों
niṣpapāta tatastūrṇaṁ putras tava viśāmpate | sahito bhrātṛbhis tais tu devair iva śatakratuḥ, prajānātha |
त्यानंतर, प्रजानाथ! तुमचा पुत्र दुर्योधन आपल्या भावांसह त्वरेने छावणीबाहेर निघून गेला—जणू देवांसह शतक्रतु इंद्र आपल्या भवनातून बाहेर पडला असावा।
कर्ण उवाच