Tīrtha-Sevana and the Cursed Apsaras
Grāha-Encounter at Saubhadra Tīrtha
अथ मायां पुनर्देवास्तयोशक्षक्रुर्महात्मनो: । भगिन्यो मातरो भार्यास्तयोक्षात्मजनस्तथा,तत्पश्चात् देवताओंने महान् आत्मबलसे सम्पन्न उन दोनों दैत्योंके सामने पुन: मायाका प्रयोग किया। उनकी मायानिर्मित बहनें, माताएँ, पत्नियाँ तथा अन्य आत्मीयजन वहाँ भागते हुए आते और उन्हें कोई शूलधारी राक्षस बार-बार खदेड़ता तथा पृथ्वीपर पटक देता था। उनके आभूषण गिर जाते, वस्त्र खिसक जाते और बालोंकी लटें खुल जाती थीं। वे सभी आत्मीयजन सुन्द-उपसुन्दको पुकारकर चीखते हुए कहते--“बेटा! मुझे बचाओ, भैया! मेरी रक्षा करो।' यह सब सुनकर भी वे दोनों महान् व्रतधारी तपस्वी अपनी तपस्यासे नहीं डिगे; अपने व्रतको नहीं तोड़ सके
atha māyāṃ punar devās tayoḥ śakṣakruḥ mahātmanoḥ | bhaginyo mātaro bhāryās tayoḥ kṣātmajanas tathā ||
त्यानंतर देवांनी त्या दोन्ही महात्म्यांसमोर पुन्हा मायेचा प्रयोग केला; त्यांच्या बहिणी, माता, पत्नी आणि अन्य आप्तजन मायेने प्रकट झाले।
नारद उवाच