पाण्डवानां पाञ्चालगमनम्
The Pāṇḍavas’ Journey toward Pāñcāla and News of the Svayaṃvara
तताप सर्वान् दीप्तौजा ब्राह्मणत्वमवाप्तवान् | अपिबच्च तत: सोममिन्द्रेण सह कौशिक:,इस प्रकार बलाबलका विचार करके उन्होंने तपस्याको ही सर्वोत्तम बल निश्चत किया और अपने समृद्धिशाली राज्य तथा देदीप्यमान राज्यलक्ष्मीको छोड़कर, भोगोंको पीछे करके तपस्यामें ही मन लगाया। इस तपस्यासे सिद्धिको प्राप्त हो उद्दीप्त तेजवाले विश्वामित्रजीने अपने प्रभावसे सम्पूर्ण लोकोंको स्तब्ध एवं संतप्त कर दिया और (अन्ततोगत्वा) ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लिया; फिर वे इन्द्रके साथ सोमपान करने लगे
tatāpa sarvān dīptaujā brāhmaṇatvam avāptavān | apibac ca tataḥ somam indreṇa saha kauśikaḥ ||
दीप्त तेजस्वी कौशिक (विश्वामित्र) यांनी सर्व लोक संतप्त केले आणि तपाने ब्राह्मणत्व प्राप्त केले. त्यानंतर त्यांनी इंद्रासह सोमपान केले.
गन्धर्व उवाच