कुन्ती-युधिष्ठिरसंवादः
Kuntī–Yudhiṣṭhira Dialogue on Bhīma’s Mission
नूनं शांतनवो5पीह न धर्ममनुवर्तते । द्रोणश्न विदुरश्चैव कृपश्चान्ये च कौरवा:,“निश्चय ही इस विषयमें शंतनुनन्दन भीष्मजी भी धर्मका अनुसरण नहीं कर रहे हैं। द्रोण, विदुर, कृपाचार्य तथा अन्य कौरवोंकी भी यही दशा है
nūnaṃ śāṃtanavo 'pīha na dharmam anuvartate | droṇaś ca viduraś caiva kṛpaś cānye ca kauravāḥ ||
निश्चयच येथे शंतनुनंदन भीष्मही धर्माचे अनुसरण करीत नाहीत; द्रोण, विदुर, कृप आणि इतर कौरवांचीही हीच अवस्था आहे।
वैशम्पायन उवाच