Hiḍimba’s Approach and Hiḍimbā’s Warning to Bhīmasena (हिडिम्बागमनम् / हिडिम्बा-भयवचनम्)
अग्न्याधानेन यज्ञेन काषायेण जटाजिनै: । लोकान् विश्वासयित्वैव ततो लुम्पेद् यथा वृक:,“अग्निहोत्र और यज्ञ करके, गेरुए वस्त्र, जटा और मृगचर्म धारण करके पहले लोगोंमें विश्वास उत्पन्न करे; फिर अवसर देखकर भेड़ियेकी भाँति शत्रुओंपर टूट पड़े और उन्हें नष्ट कर दे
अग्न्याधान व यज्ञ करून, काषाय वस्त्र, जटा आणि मृगचर्म धारण करून प्रथम लोकांचा विश्वास संपादन करावा; मग संधी साधून लांडग्यासारखा झडप घालून शत्रूंना लुटून नष्ट करावे.
वैशम्पायन उवाच