धृतराष्ट्र–दुर्योधन संवादः
Vāraṇāvata-vivāsana-nīti: Dhṛtarāṣṭra and Duryodhana’s Policy Dialogue
जगाम रेतस्तत् तस्य शरस्तम्बे पपात च । शरस्तम्बे च पतितं द्विधा तदभवन्नूप,वे मुनि बाणसहित धनुष, काला मृगचर्म, वह आश्रम और वह अप्सरा--सबको वहीं छोड़कर वहाँसे चल दिये। उनका वह वीर्य सरकंडेके समुदाय-पर गिर पड़ा। राजन! वहाँ गिरनेपर उनका वीर्य दो भागोंमें बँट गया
vaiśampāyana uvāca | jagāma retas tat tasya śarastambe papāta ca | śarastambe ca patitaṃ dvidhā tad abhavan nṛpa ||
नृपा! तो निघताच त्याचं वीर्य सरकंड्यांच्या झुडपावर पडलं; आणि त्या झुडपावर पडताच ते दोन भागांत विभागलं गेलं.
वैशम्पायन उवाच