Droṇa–Drupada Saṃvāda and Droṇa’s Reception at the Kuru Court (द्रोण-द्रुपद-संवादः; कुरुनगरप्रवेशः)
वैशम्पायन उवाच सा तथोक्ता तथेत्युक्त्वा तेन भर्त्रा वराड़ना | अभिवाद्याभ्यनुज्ञाता प्रदक्षिणमवर्तत,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! अपने पति पाण्डुके यों कहनेपर नारियोंमें श्रेष्ठ कुन्तीने “तथास्तु/ कहकर उन्हें प्रणाम किया और आज्ञा लेकर उनकी परिक्रमा की
वैशंपायन म्हणाले—राजन्! पती पांडू असे बोलताच स्त्रियांमध्ये श्रेष्ठ कुंतीने ‘तथास्तु’ असे म्हणून त्यांना प्रणाम केला; आज्ञा घेऊन प्रदक्षिणा घातली।
वैशम्पायन उवाच