पाण्डोः श्राद्धं, सत्यवत्याः वनगमनम्, बाल्यस्पर्धा च
Pāṇḍu’s Śrāddha, Satyavatī’s Withdrawal, and Childhood Rivalry
एवमारण्यशास्त्राणामुग्रमुग्रतरं विधिम् । काड्क्षमाणो5हमास्थास्ये देहस्यास्या समापनात्,इस प्रकार मैं वानप्रस्थ-आश्रमसम्बन्धी शास्त्रोंकी कठोर-से-कठोर विधियोंके पालनकी आकांक्षा करता हुआ तबतक वानप्रस्थ-आश्रममें स्थित रहूँगा जबतक कि शरीरका अन्त न हो जाय
“अशा रीतीने आरण्यक-शास्त्रांतील अत्यंत कठोर विधी पाळण्याची आकांक्षा धरून, देहाचा अंत होईपर्यंत मी त्या व्रतधर्मात स्थित राहीन.”
वैशम्पायन उवाच