Ādi Parva, Adhyāya 115 — Mādri’s request; invocation of the Aśvins; birth and naming of the Pāṇḍavas
तदाख्यातं॑ तु भीष्माय विदुराय च धीमते । यस्मिन्नहनि दुर्धर्षो जज्ञे दुर्योधनस्तदा,दुर्योधनके जन्मका समाचार परम बुद्धिमान् भीष्म तथा विदुरजीको बताया गया। जिस दिन दुर्धर्ष वीर दुर्योधनका जन्म हुआ, उसी दिन परम पराक्रमी महाबाहु भीमसेन भी उत्पन्न हुए। राजन! धृतराष्ट्रका वह पुत्र जन्म लेते ही गदहेके रेंकनेकी-सी आवाजमें रोने-चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर बदलेमें दूसरे गदहे भी रेंकने लगे। गीध, गीदड़ और कौए भी कोलाहल करने लगे
tad ākhyātaṃ tu bhīṣmāya vidurāya ca dhīmate | yasminn ahani durdharṣo jajñe duryodhanas tadā ||
वैशंपायन म्हणाले—हा वृत्तांत नंतर भीष्मांना आणि परम बुद्धिमान विदुरांना सांगितला गेला. ज्या दिवशी दुर्धर्ष दुर्योधनाचा जन्म झाला, त्याच दिवशी त्याच्या आगमनासोबत अनेक अशुभ निमित्ते प्रकट झाली—जी पुढे ज्येष्ठजन धर्म आणि कुरुवंशाच्या भावी कल्याणाच्या दृष्टीने तौलतील.
वैशम्पायन उवाच