Virāṭa-parva Adhyāya 25: Kaurava Deliberation and the Search Directive (अन्वेषण-आदेशः)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ३४ श्लोक हैं।) #2:8 #:23:.7 (0) हि २ 7 (गोहरणपर्व) पजञ्चविशो< ध्याय: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना वैशम्पायन उवाच (कीचके तु हते राजा विराट: परवीरहा । शोकमाहारयत तीव्रं सामात्य: सपुरोहितः ।।) वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! कीचकके मारे जानेपर शत्रुवीरोंका वध करनेवाले राजा विराट पुरोहित और मन्त्रियोंसहित बहुत दुःखी हुए। कीचकस्य तु घातेन सानुजस्य विशाम्पते । अत्याहितं चिन्तयित्वा व्यस्मयन्त पृथग् जना:,नरेश्वर! भाइयोंसहित कीचकका वध होनेसे सब लोग इसको बड़ी भारी दुर्घटना या दुःसाहसका काम मानकर अलग-अलग आश्चर्यमें पड़े रहे इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि चारप्रत्यागमने पञठ्चविंशो5ध्याय: ।। २५ || इस प्रकार श्रीमह्ाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत योहरणपर्वमें गुप्तचरोंके लौटकर आनेसे सम्बन्ध रखनेवाला पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ २५ ॥/ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६ श्लोक मिलाकर कुल २८ श्लोक हैं।) हि >> आय न () है ० 7 षड्विशो<5ध्याय: दुर्योधनका सभासदोंसे पाण्डवोंका पता लगानेके लिये परामर्श तथा इस विषयमें कर्ण और दुःशासनकी सम्मति वैशम्पायन उवाच ततो दुर्योधनो राजा ज्ञात्वा तेषां वचस्तदा । चिरमन्तर्मना भूत्वा प्रत्युवाच सभासद:
vaiśampāyana uvāca |
kīcake tu hate rājā virāṭaḥ paravīrahā |
śokam āhārayat tīvraṃ sāmātyaḥ sapurohitaḥ ||
വൈശമ്പായനൻ പറഞ്ഞു—രാജാവേ! കീചകൻ വധിക്കപ്പെട്ടപ്പോൾ ശത്രുവീരന്മാരെ സംഹരിക്കുന്ന വിരാടരാജാവ് മന്ത്രിമാരോടും പുരോഹിതനോടും കൂടി അതിതീവ്രമായ ശോകത്തിൽ മുങ്ങി.
वैशम्पायन उवाच
The verse highlights how personal attachment and political dependence can produce intense grief even for a powerful king; it implicitly invites ethical reflection on how courts may mourn the loss of influential figures without fully confronting their misconduct and its consequences.
After Kīcaka is killed, King Virāṭa reacts with severe sorrow, and the court—ministers and the royal priest included—shares in the mourning, setting the stage for the wider repercussions of Kīcaka’s death during the Pāṇḍavas’ incognito stay.