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Shloka 9

अध्याय १५ — कीचकस्य अत्याचारः, द्रौपद्याः सभाशरणगमनम्

Kīcaka’s coercion and Draupadī’s appeal in the assembly

तस्मिन्‌ कृते तदा देवी कीचकेनोपमन्त्रिता । उसकी व्यवस्था हो जानेपर कीचकने सुदेष्णाको भोजनके लिये आमन्त्रित किया ।। ८ हे || हे (त्वरावान्‌ कालपाशेन कण्ठे बद्ध: पशुर्यथा । नावबुध्यत मूढात्मा मरणं समुपस्थितम्‌ ।। मूढात्मा कीचक कण्ठमें कालपाशसे बँधे हुए पशुकी भाँति अपने निकट आयी हुई मृत्युको नहीं जान पाता था। वह द्रौपदीको पानेके लिये उतावला हो रहा था। कीचक उवाच मधु मद्य॑ बहुविध॑ भक्ष्याश्व विविधा: कृता: । सुदेष्णे ब्रूहि सैरन्ध्री यथा सा मे गृहं व्रजेत्‌ ।। कीचक बोला--सुदेष्णे! मैंने नाना प्रकारकी मीठी मदिरा मँगा ली है और विविध प्रकारकी रसोई भी तैयार कर ली है। अब तुम सैरन्ध्रीसे कह दो, जिससे वह मेरे घरमें पधारे। केनचित्‌ त्वद्य कार्येण त्वर शीघ्रं मम प्रियम्‌ ।। अहं हि शरण देवं प्रपद्ये वृषभध्वजम्‌ । समागमं मे सैरन्ध्रया मरणं वा दिशेति वै ।। किसी कामके बहाने उसे जल्दी मेरे यहाँ भेजो। मेरा प्रिय कार्य सिद्ध करनेमें शीघ्रता करो। मैं भगवान्‌ शंकरकी शरण लेकर यह प्रार्थना करता हूँ कि प्रभो! मुझे सैरन्ध्रीसे मिला दो अथवा मृत्यु प्रदान करो। वैशम्पायन उवाच सा तमाह विनि:श्वस्य प्रतिगच्छ स्वकं गृहम्‌ । एषाहमपि सैरन्ध्रीं सुरार्थे तूर्णमादिशे ।। वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तब सुदेष्णा लंबी साँस खींचकर उससे बोली --'तुम अपने घर लौट जाओ । मैं सैरन्ध्रीको शीघ्र ही वहाँसे मदिरा ले आनेके लिये आज्ञा देती हूँ! । एवमुक्तस्तु पापात्मा कीचकस्त्वरित: पुनः । स्वगृहं प्राविशत्‌ तूर्ण सैरन्ध्रीगतमानस: ।।) उसके ऐसा कहनेपर सैरन्ध्रीका चिन्तन करता हुआ पापात्मा कीचक फिर तुरंत ही अपने घरको लौट गया। सुदेष्णा प्रेषयामास सैरन्ध्रीं कीचकालयम्‌,तब सुदेष्णाने सैरन्ध्रीको कीचकके घर जानेके लिये कहा

tasmin kṛte tadā devī kīcakena upamantritā | sudeṣṇā preṣayāmāsa sairandhrīṁ kīcakālayam ||

വൈശമ്പായനൻ പറഞ്ഞു—ഈ ഒരുക്കങ്ങൾ കഴിഞ്ഞപ്പോൾ കീചകന്റെ നിർബന്ധപ്രാർത്ഥനയാൽ ദേവി സുദേഷ്ണ സൈരന്ധ്രീയെ കീചകന്റെ ഭവനത്തിലേക്കു അയച്ചു.

तस्मिन्in that (situation/time)
तस्मिन्:
Adhikarana
TypePronoun
Rootतद्
FormMasculine/Neuter, Locative, Singular
कृतेwhen (it was) done
कृते:
Adhikarana
TypeParticiple
Rootकृ (क्त)
FormNeuter, Locative, Singular
तदाthen
तदा:
Adhikarana
TypeIndeclinable
Rootतदा
देवीthe queen/lady (Sudeshna)
देवी:
Karta
TypeNoun
Rootदेवी
FormFeminine, Nominative, Singular
कीचकेनby Kichaka
कीचकेन:
Karana
TypeNoun
Rootकीचक
FormMasculine, Instrumental, Singular
उपमन्त्रिताwas invited/solicited
उपमन्त्रिता:
Karta
TypeParticiple
Rootउप-मन्त्र् (क्त)
FormFeminine, Nominative, Singular

वैशम्पायन उवाच

V
Vaiśampāyana
K
Kīcaka
S
Sudeṣṇā
S
Sairandhrī (Draupadī in disguise)
K
Kīcaka’s residence (kīcakālaya)