Ṛśyaśṛṅgopākhyāna-praveśaḥ — Lomāśa narrates the origins of Ṛśyaśṛṅga and the Anga drought (ऋश्यशृङ्गोपाख्यान-प्रवेशः)
लोगश उवाच विभाण्डकस्य विप्रर्षेस्तपसा भावितात्मन: । अमोघवीर्यस्य सत: प्रजापतिसमद्युते:,लोमशजीने कहा--राजन! ब्रह्मर्षि विभाण्डकका अन्तःकरण तपस्यासे पवित्र हो गया था। वे प्रजापतिके समान तेजस्वी और अमोघवीर्य महात्मा थे। उनके प्रतापी पुत्र ऋष्यशृंगका जन्म कैसे हुआ, यह बताता हूँ, सुनो। जैसे विभाण्डक मुनि परम पूजनीय थे, वैसे ही उनका पुत्र भी बड़ा तेजस्वी हुआ। वह बाल्यावस्थामें भी वृद्ध पुरुषोंद्वारा सम्मानित होता था
lomaśa uvāca
vibhāṇḍakasya viprarṣes tapasa bhāvitātmanaḥ |
amoghavīryasya sataḥ prajāpati-samadyuteḥ ||
ലോമശൻ പറഞ്ഞു—രാജാവേ! ബ്രഹ്മർഷി വിഭാണ്ഡകന്റെ അന്തഃകരണം തപസ്സാൽ ശുദ്ധിയും ദൃഢതയും പ്രാപിച്ചിരുന്നു. അദ്ദേഹം സത്യനിഷ്ഠനും അമോഘവീര്യനും പ്രജാപതിയെപ്പോലെ തേജസ്വിയായ മഹാത്മാവുമായിരുന്നു.
लोगश उवाच