मैत्रेयागमनम् — The Arrival of Maitreya and the Admonition to Duryodhana
इत्युक्त्वैनमतिक्रुद्धः कक्ष्यामुत्पीड्य पाण्डव: । निष्पिष्य पाणिना पार्णिं संदष्टौष्पपुटो बली,ऐसा कहकर अत्यन्त क्रोधमें भरे हुए बलवान् पाण्डुनन्दन भीमने वस्त्रसे अच्छी तरह अपनी कमर कस ली और हाथ-से-हाथ रगड़कर दाँतोंसे ओंठ चबाते हुए वृक्षको ही आयुध बनाकर बड़े वेगसे उसकी तरफ दौड़े और जैसे इन्द्र वज्जका प्रहार करते हैं, उसी प्रकार यमदण्डके समान उस भयंकर वृक्षको राक्षसके मस्तकपर उन्होंने बड़े जोरसे दे मारा। तो भी वह निशाचर युद्धमें अविचलभावसे खड़ा दिखायी दिया
ity uktvainam atikruddhaḥ kakṣyām utpīḍya pāṇḍavaḥ | niṣpiṣya pāṇinā pārṇiṃ saṃdaṣṭauṣṭhaputo balī ||
ഇങ്ങനെ പറഞ്ഞ് അതിക്രോധം നിറഞ്ഞ ബലവാനായ പാണ്ഡവൻ ഭീമൻ അരക്കെട്ട് മുറുക്കി, കൈകൾ ഉരച്ചു, പല്ലുകൊണ്ട് അധരങ്ങൾ അമർത്തി യുദ്ധത്തിന് ഒരുങ്ങി.
विदुर उवाच