यत्र पूर्वाभिसर्गे वै धर्मचक्रं प्रवर्तितम् । नैमिषे गोमतीतीरे तत्र नागाह्नयं पुरम्,द्विजश्रेष्ठ! पूर्वकल्पमें जहाँ प्रजापतिने धर्मचक्र प्रवर्तित किया था, सम्पूर्ण देवताओं ने जहाँ यज्ञ किया था तथा जहाँ राजाओंमें श्रेष्ठ मान्धाता यज्ञ करनेमें इन्द्रसे भी आगे बढ़ गये थे, उस नैमिषारण्यमें गोमतीके तटपर नागपुर नामक एक नगर है
yatra pūrvābhisarge vai dharmacakraṁ pravartitam | naimiṣe gomatītīre tatra nāgāhnayaṁ puram, dvijaśreṣṭha |
ഹേ ദ്വിജശ്രേഷ്ഠാ! പൂർവ്വസൃഷ്ടിയിൽ ധർമ്മചക്രം പ്രവർത്തിതമായ നൈമിഷത്തിൽ, ഗോമതീതീരത്ത് ‘നാഗാഹ്നയ’ എന്നൊരു നഗരം ഉണ്ട്।
ब्राह्मण उवाच