जनक–सुलभा संवादः
Janaka–Sulabhā Dialogue on Mokṣa and Non-attachment
नारदाद् विदितं महामेतद् ब्रह्म सनातनम् | मा शुच: कौरवेन्द्र त्वं श्रुव्वैतत् परमं पदम्,ब्रह्माजीसे महात्मा वसिष्ठ मुनिने यह ज्ञान प्राप्त किया था। मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठसे यह नारदजीको उपलब्ध हुआ और नारदजीसे मुझे यह सनातन ब्रह्मका उपदेश प्राप्त हुआ है। कौरवनरेश! यह ज्ञान परमपद है। इसे सुनकर अब तुम शोकका त्याग कर दो
bhīṣma uvāca | nāradād viditaṃ mahad etad brahma sanātanam | mā śucaḥ kauravendra tvaṃ śṛṇvaitat paramaṃ padam ||
ഭീഷ്മൻ പറഞ്ഞു—നാരദനിലൂടെ എനിക്കു ഈ മഹത്തായ സനാതന ബ്രഹ്മം അറിയപ്പെട്ടു. കൌരവേന്ദ്രാ! ശോകിക്കരുത്; പരമപദമായ ഈ ഉപദേശം കേൾക്കുക.
भीष्म उवाच