Ākiṃcanya–Tyāga Upadeśa
The Instruction on Non-ownership and Renunciation
पम्प बछ। अ-काज जा एकोनसप्तत्याधिकशततमो< ध्याय: गौतमका समुद्रकी ओर प्रस्थान और संध्याके समय एक दिव्य बकपक्षीके घरपर अतिथि होना भीष्म उवाच तस्यां निशायां व्युष्टायां गते तस्मिन् द्विजोत्तमे | निष्क्रम्य गौतमो5गच्छत् समुद्र प्रति भारत,भीष्मजी कहते हैं--भारत! जब रात बीती, सबेरा हुआ और वह श्रेष्ठ ब्राह्मण वहाँसे चला गया, तब गौतम भी घर छोड़कर समुद्रकी ओर चल दिया इस प्रकार श्रीमह्याभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें कृतघ्नका उपाख्यानविषयक एक सौ उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १६९ ॥। ऑपनआक्रात बछ। अर: 2 सप्तत्याधेकशततमो< ध्याय: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश भीष्म उवाच गिरं तां मधुरां श्रुत्वा गौतमो विस्मितस्तदा । कौतूहलान्वितो राजन् राजधर्माणमैक्षत
bhīṣma uvāca | tasyāṃ niśāyāṃ vyuṣṭāyāṃ gate tasmin dvijottame | niṣkramya gautamo ’gacchat samudraṃ prati bhārata ||
ഭീഷ്മൻ പറഞ്ഞു—ഹേ ഭാരത (യുധിഷ്ഠിര)! ആ രാത്രി കഴിഞ്ഞ് പ്രഭാതം വന്നപ്പോൾ, ആ ശ്രേഷ്ഠ ബ്രാഹ്മണൻ അവിടെ നിന്ന് പുറപ്പെട്ടതോടെ, ഗൗതമനും തന്റെ വാസസ്ഥലം വിട്ട് സമുദ്രത്തേയ്ക്ക് യാത്രയായി।
भीष्म उवाच