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Shloka 25

मृत्यु-काल-प्रबोधनम् (Instruction on Mortality, Time, and Truth) — Mahābhārata, Śānti-parva 169

तस्य विस्तीर्यते राज्यं ज्योत्स्ना ग्रहपतेरिव । प्रभो! जो अपनी शक्तिके अनुसार कर्तव्यका ठीक-ठीक पालन करते और संतुष्ट रहते हैं, जिन्हें बेमौके क्रोध नहीं आता, जो अकस्मात्‌ स्नेहका त्याग नहीं करते, जो उदासीन हो जानेपर भी मनसे कभी बुराई नहीं चाहते, अर्थके तत्त्वको समझते हैं और अपनेको कष्टमें डालकर भी हितैषी पुरुषोंका कार्य सिद्ध करते हैं। जैसे रैगा हुआ ऊनी कपड़ा अपने रंग नहीं छोड़ता, उसी प्रकार जो मित्रकी ओरसे विरक्त नहीं होते हैं, जो क्रोधवश मित्रका अनर्थ करनेमें प्रवृत्त नहीं होते हैं तथा लोभ और मोहके वशीभूत हो मित्रकी युवतियोंपर अपनी आसक्ति नहीं दिखाते, जो मित्रके विश्वासपात्र और धर्मके प्रति अनुरक्त हैं, जिनकी दृष्टिमें मिट्टीका ढेला और सोना दोनों एक-से हैं, जो सदा सुहृदोंके प्रति सुस्थिर बुद्धि रखनेवाले हैं, सबके लिये प्रमाणभूत शास्त्रोंके अनुसार चलते हैं और प्रारब्धवश प्राप्त हुए धनमें ही संतुष्ट रहते हैं, जो कुट॒म्बका संग्रह रखते हुए सदा अपने सुहृद्‌ एवं स्वामीके कार्य-साधनमें तत्पर रहते हैं--ऐसे श्रेष्ठ पुरुषोंके साथ जो राजा संधि (मेल) करता है, उसका राज्य उसी तरह बढ़ता है, जैसे चन्द्रमाकी चाँदनी || २०-२४ $ ।। शास्त्रनित्या जितक्रोधा बलवन्तो रणे सदा

tasya vistīryate rājyaṃ jyotsnā grahapater iva |

ആ രാജാവിന്റെ രാജ്യം ഗ്രഹപതിയായ ചന്ദ്രന്റെ ജ്യോത്സ്നപോലെ വ്യാപിച്ചു വളരുന്നു.

तस्यof him/its
तस्य:
Adhikarana
TypePronoun
Rootतद्
FormMasculine/Neuter, Genitive, Singular
विस्तीर्यतेis expanded/spreads
विस्तीर्यते:
Karma
TypeVerb
Rootवि-स्तॄ (स्तॄ)
FormPresent, Third, Singular, Atmanepada, Passive/Impersonal (middle usage)
राज्यम्kingdom, realm
राज्यम्:
Karta
TypeNoun
Rootराज्य
FormNeuter, Nominative, Singular
ज्योत्स्नाmoonlight
ज्योत्स्ना:
Karta
TypeNoun
Rootज्योत्स्ना
FormFeminine, Nominative, Singular
ग्रहपतेःof the lord of planets (the Moon)
ग्रहपतेः:
Adhikarana
TypeNoun
Rootग्रहपति
FormMasculine, Genitive, Singular
इवlike, as
इव:
TypeIndeclinable
Rootइव

भीष्म उवाच

B
Bhishma (speaker)
M
Moon (Candra, implied by grahapati)
M
Moonlight (jyotsnā)
K
Kingdom/sovereignty (rājya)