Nirmaryāda-saṃgrāma-varṇana — The Unbounded Clash and Bhīṣma’s Rallying Presence
सम्बन्ध-- आयुरस्वभाववाले मनुष्योंकोी लगातार आयुरी योनियोंके और घोर नरकोंके प्राप्त होनेकी बात युनकर यह जिज्ञासा हो सकती है कि उनके लिये इस दुर्गीतिसे बचकर परम गतिको प्राप्त करनेका क्या उपाय है; इसपर कहते हैं-- त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: । काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत् त्रयं त्यजेत्,काम, क्रोध तथा लोभ--ये तीन प्रकारके नरकके द्वार आत्माका नाश करनेवाले अर्थात् उसको अधोगतिमें ले जानेवाले हैं।। अतएव इन तीनोंको त्याग देना चाहिये
trividhaṁ narakasyedaṁ dvāraṁ nāśanam ātmanaḥ | kāmaḥ krodhas tathā lobhas tasmād etat trayaṁ tyajet ||
നരകത്തിലേക്കുള്ള ഈ മൂന്ന് വാതിലുകൾ—കാമം, ക്രോധം, ലോഭം—ആത്മനാശകരങ്ങളാണ്; അതിനാൽ ഈ ത്രയം ഉപേക്ഷിക്കണം.
अजुन उवाच