Bhīṣma–Karṇa Saṃvāda on the Śaraśayyā (भीष्म–कर्ण संवादः शरशय्यायाम्)
इस प्रकार श्रीमह़्ा भारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीमसेनका पराक्रमविषयक एक सौ तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ११३ ॥। [दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ५४ “लोक हैं।] ऑपन-माज छा डे: चतुर्दशाधिकशततमो< ध्याय: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंके साथ युद्धमें भीमसेन और अर्जुनका अद्भुत पुरुषार्थ संजय उवाच अर्जुनस्तु रणे शल्यं यतमानं महारथम् । छादयामास समरे शरै: संनतपर्वभि:,संजय कहते हैं--राजन! उस समय रफक्षेत्रमें विजयके लिये प्रयत्न करनेवाले महारथी शल्यको अर्जुनने झुकी हुई गाँठवाले बाणोंकी वर्षा करके ढक दिया
sañjaya uvāca | arjunas tu raṇe śalyaṃ yatamānaṃ mahāratham | chādayāmāsa samare śaraiḥ saṃnataparvabhiḥ ||
സഞ്ജയൻ പറഞ്ഞു—രാജാവേ! അന്ന് യുദ്ധത്തിൽ വിജയം ലക്ഷ്യമാക്കി പരിശ്രമിച്ച മഹാരഥൻ ശല്യനെ അർജുനൻ വളഞ്ഞ കെട്ടുകളുള്ള അമ്പുകളുടെ ഘനവൃഷ്ടിയാൽ മൂടിക്കളഞ്ഞു।
संजय उवाच