Cyavana Explains His Tests; Kuśika Seeks Brāhmaṇya for His Line (च्यवन–कुशिक संवादः)
एत॑ दोषं पुरा दृष्टवा भार्गवश्ष्यवनस्तदा । आगामिन॑ महाबुद्धि: स्ववंशे मुनिसत्तम:,पूर्वकालमें भृगुपुत्र च्यवनको यह बात मालूम हुई कि हमारे वंशमें कुशिक-वंशकी कन्याके सम्बन्धसे क्षत्रियत्वका महान् दोष आनेवाला है। यह जानकर उन परम बुद्धिमान् मुनिश्रेष्ठने मन-ही-मन सारे गुण-दोष और बलाबलका विचार किया। तत्पश्चात् कुशिकोंके समस्त कुलको भस्म कर डालनेकी इच्छासे तपोधन च्यवन राजा कुशिकके पास गये और इस प्रकार बोले--“निष्पाप नरेश! मेरे मनमें कुछ कालतक तुम्हारे साथ रहनेकी इच्छा हुई है!
പുരാതനകാലത്ത് ഭാർഗവനായ ച്യവനമുനി വരാനിരിക്കുന്ന ഈ ദോഷം കണ്ടറിഞ്ഞപ്പോൾ, മഹാബുദ്ധിയുള്ള ആ മുനിശ്രേഷ്ഠൻ തന്റെ വംശത്തിന്റെ ഹിതാഹിതങ്ങൾ മനസ്സിൽ തന്നെ ആലോചിച്ചു.
भीष्म उवाच