देवविमान-दर्शनम् / The Celestial Assembly and Vimana Spectacle
Bhīṣma–Arjuna Encounter Framed Cosmically
दुर्योधन उवाच आचार्य एव क्षमतां शान्तिरत्र विधीयताम् । अभिश्यमाने तु गुरी तद् वृत्तं रोषकारितम्,दुर्योधनने कहा--आचार्य! क्षमा करें, अब शान्ति धारण करनी चाहिये। यदि गुरुके मनमें भेद न हो, तभी यह समझा जायगा कि पहले जो बातें कही गयी हैं, उनमें रोष ही कारण था
ດຸຣະໂຢທະນະ ກ່າວວ່າ: «ອາຈານເອີຍ, ຂໍອະໄພ. ບັດນີ້ຄວນວາງຄວາມສະຫງົບ. ຖ້າໃນໃຈຂອງອາຈານບໍ່ມີຄວາມແຕກແຍກ ຈຶ່ງຈະເຂົ້າໃຈໄດ້ວ່າ ຄຳທີ່ເວົ້າໄວ້ກ່ອນນັ້ນ ເກີດຈາກຄວາມໂກດເປັນເຫດ»។
दुर्योधन उवाच