शमीवृक्षस्थायुधप्रकाशनम् / Revelation and Identification of the Weapons on the Śamī Tree
संग्रामे न च कार्य मे गावो गच्छन्तु चापि मे । शून्यं मे नगरं चापि पितुश्चैव बिभेम्यहम्,उत्तर बोला--बृहन्नले! भारी संख्यामें आये हुए कौरव भले ही मत्स्यदेशका सारा धन इच्छानुसार हर ले जाया, स्त्रियाँ अथवा पुरुष जितना चाहें, मेरा उपहास करें तथा मेरी गौएँ भी चली जाया; किंतु इस युद्धमें मेरा कोई काम नहीं है। मेरा नगर सूना पड़ा है। [पिताजी उसकी रक्षाका भार मुझे दे गये थे|। मैं पिताजीसे डरता हूँ [इसलिये यहाँ नहीं ठहर सकता]
saṅgrāme na ca kārya me gāvo gacchantu cāpi me | śūnyaṃ me nagaraṃ cāpi pituś caiva bibhemy aham ||
ອຸຕຕະຣະ ກ່າວວ່າ: “ໃນສົງຄາມນີ້ ຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ມີທຸລະ. ໃຫ້ພວກເຂົາຕ້ອນງົວຂອງຂ້າພະເຈົ້າໄປດ້ວຍ. ເມືອງຂອງຂ້າພະເຈົ້າຖືກປະໄວ້ເປົ່າ ແລະຂ້າພະເຈົ້າກໍຢ້ານພໍ່ດ້ວຍ.”
उत्तर उवाच