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Shloka 30

भीमस्य बल्लव-प्रतिज्ञा तथा अर्जुनस्य बृहन्नडा-रूप-निर्णयः

Bhīma’s Ballava Vow and Arjuna’s Decision to Become Bṛhannadā

प्रजानां समुदाचारं बहु कर्म कृतं वदन्‌ छादयिष्यामि कौन्तेय मायया55त्मानमात्मना,कुन्तीनन्दन! प्रजाजनोंके उत्तम आचार-विचार और उनके किये हुए अनेक प्रकारके सत्कर्मोंका वर्णन करता हुआ मैं मायामय नपुंसकवेशसे बुद्धिद्वारा अपने यथार्थ स्वरूपको छिपाये रखूँगा

ໂອ ກຸນຕີບຸດ, ຂ້າພະເຈົ້າຈະເວົ້າພັນລະນາເຖິງຈະຣິຍາທີ່ດີຂອງປະຊາຊົນ ແລະກິດການດີຫຼາຍປະການທີ່ເຂົາເຄີຍເຮັດ; ແລະດ້ວຍມາຍາ ຂ້າພະເຈົ້າຈະປິດບັງຕົວຕົນແທ້ຂອງຕົນ ໂດຍປັນຍາຂອງຕົນເອງ ພາຍໃຕ້ເຄື່ອງນຸ່ງນະພຸງສະກອັນເປັນກົນອຸບາຍ.

अजुन उवाच