Draupadī’s Grief at Seeing the Heroes in Disguise (द्रौपदी-विषादः / वेष-परिभव-वर्णनम्)
रुक््मं हिरण्यं वासांसि यान॑ युग्यमजाविकम् | अध्वाश्वतरसड्घांश्व न जातु क्षयमावहेत्,यदि वे प्रतिदिन शाम-सबेरे एक सहसख्र स्वर्ण-मुद्राओंसे जूआ खेलते तथा जो दूसरे बहुमूल्य धन थे, उनको--सोने, चाँदी, वस्त्र, सवारी, रथ, बकरी, भेड़, घोड़े और खच्चरों आदिके समूहको बहुत वर्षोतक भी दाँवपर लगाते रहते, तो भी हमारा राज्य-वैभव कभी क्षीण नहीं होता
vaiśampāyana uvāca | rukmaṁ hiraṇyaṁ vāsāṁsi yānāni yugyam ajāvikam | adhvāśvatarasaṅghāṁś ca na jātu kṣayam āvahet |
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: «ເຄື່ອງປະດັບຄໍາ, ຄໍາທອງແທ້, ເສື້ອຜ້າ, ພາຫະນະ, ຄູ່ສັດສໍາລັບຜູກລາກ, ແລະຝູງແບ້ກັບແກະ—ພ້ອມທັງຝູງມ້າແລະລໍ—ບໍ່ເຄີຍນໍາມາຊຶ່ງການຫຼຸດຖອຍແຫ່ງຄວາມຮຸ່ງເຮືອງຂອງພວກເຮົາ. ແມ່ນແຕ່ຖ້າວັນຕໍ່ວັນວາງພະນັນເຫຼຽນຄໍາພັນໜຶ່ງ ແລະວາງພະນັນຊັບອັນລໍ້າຄ່າເຫຼົ່ານີ້ຫຼາຍປີ ກໍບໍ່ອາດເຮັດໃຫ້ສະຫງ່າລາສີແລະຊັບພະຍາກອນແຫ່ງອານາຈັກຂອງພວກເຮົາຫມົດສິ້ນໄດ້».
वैशम्पायन उवाच