हिरण्यपुरवर्णनम्
Description of Hiraṇyapura and the Nivātakavacas
अत्र सूर्याशुभिर्भिन्ना: पातालतलमश्रिता: । मृता हि दिवसे सूत पुनर्जीवन्ति वै निशि,मातले! ये पातालनिवासी जीव-जन्तु यहाँ दिनमें सूर्यकी किरणोंसे संतप्त हो मृतप्राय अवस्थामें पहुँच जाते हैं; परंतु रात होनेपर अमृतमयी चन्द्ररश्मियोंके सम्पर्कसे पुनः जी उठते हैं
ຢູ່ບ່ອນນີ້ ສັດມີຊີວິດທີ່ອາໄສໃນປາຕາລ ຖືກແສງຕາເວັນອັນຮ້ອນແຮງເຜົາຜານ ຈົນເກືອບຕາຍໃນຕອນກາງວັນ; ແຕ່ເມື່ອຄ່ຳຄືນມາເຖິງ ດ້ວຍການສຳຜັດກັບແສງຈັນທຣາອັນເປັນດັ່ງນ້ຳອະມຣິຕ ພວກມັນກໍຟື້ນຄືນຊີວິດ—ໂອ ມາຕະເລ!
नारद उवाच