Dambhodbhava, Nara-Nārāyaṇa, and the Counsel to Abandon Hubris
Udyoga-parva 94
ये धर्ममनुपश्यन्तस्तूष्णी ध्यायन्त आसते । ते सत्यमाहुर्धम्य च न्याय्यं च भरतर्षभ,भरतश्रेष्ठ! जो पाण्डव सदा धर्मकी ओर ही दृष्टि रखते हैं और उसीका विचार करके चुपचाप बैठे हैं, वे जो आपसे राज्य लौटा देनेका अनुरोध करते हैं, वह सत्य, धर्मसम्मत और न्यायसंगत है
ໂອ ຜູ້ເປັນຍອດແຫ່ງວົງສາພາຣະຕະ! ບັນດາຜູ້ຮັກທຳມະ ຜູ້ມອງເຫັນທຳມະຢູ່ເສມອ ແລະນັ່ງສະຫງົບຄິດໄຕ່ຕອງ—ຄຳທີ່ເຂົາຂໍໃຫ້ທ່ານຄືນອານາຈັກໃຫ້ພານດະວະນັ້ນ ແມ່ນຄຳຈິງ ຖືກຕ້ອງຕາມທຳມະ ແລະຊອບທຳຕາມຍຸດຕິທຳ.
वैशम्पायन उवाच