अध्याय ३९: विदुरेण धृतराष्ट्राय नीत्युपदेशः
Timely Counsel, Association, and Kin-Duty
अजाश्ष कांस्यं रजतं च नित्यं॑ मध्वाकर्ष: शकुनि: श्रोत्रियश्व । वृद्धो ज्ञातिरवसन्न: कुलीन एतानि ते सन्तु गृहे सदैव,बकरियाँ, काँसेका पात्र, चाँदी, मधु, धनुष, पक्षी, वेदवेत्ता ब्राह्मण, बूढ़ा कुटुम्बी और विपत्तिग्रस्त कुलीन पुरुष--ये सब आपके घरमें सदा मौजूद रहें
«ແບ້, ພາຊະນະທອງແດງ, ເງິນ, ນ້ໍາເຜິ້ງ, ຄັນທະນູ, ນົກ, ພຣາຫມັນຜູ້ຮູ້ເວດ, ຍາດຜູ້ເຖົ້າ, ແລະຜູ້ມີຊາດຕະກູນທີ່ຕົກທຸກ—ຂໍໃຫ້ສິ່ງເຫຼົ່ານີ້ມີຢູ່ໃນເຮືອນຂອງເຈົ້າເສມອ»។
विदुर उवाच