Shloka 8

अरुन्तुदं परुषं रूक्षवा्चं वाक्कण्टकैर्वितुदन्तं मनुष्यान्‌ । विद्यादलक्ष्मीकतमं जनानां मुखे निबद्धां निर्क्रतिं वै वहन्तम्‌,जिसकी वाणी रूखी और स्वभाव कठोर है, जो मर्मस्थानपर आघात करता और वाग्बाणोंसे मनुष्योंको पीड़ा पहुँचाता है, उसे ऐसा समझना चाहिये कि वह मनुष्योंमें महादरिद्र है और वह अपने मुखमें दरिद्रता अथवा मौतको बाँधे हुए ढो रहा है

ຜູ້ໃດມີວາຈາຫຍາບກະດ້າງ ແລະນິໄສແຂງກະດ້າງ ທີ່ກະທົບຈຸດສໍາຄັນ ແລະທໍາໃຫ້ຄົນເຈັບປວດດ້ວຍລູກສອນແຫ່ງຄໍາເວົ້າ—ຄວນຮູ້ວ່າເຂົາແມ່ນຜູ້ທຸກຍາກຢ່າງຍິ່ງໃນຫມູ່ຄົນ ແລະເຫມືອນຜູ້ທີ່ຜູກຄວາມທຸກຍາກ ຫຼືຄວາມຕາຍໄວ້ໃນປາກຂອງຕົນແລ້ວແບກພາໄປ.

हंस उवाच