Adhyaya 32: Saṃjaya’s Return, Audience with Dhṛtarāṣṭra, and Ethical Admonition
नारीं विगतकामास्तु कृतार्थाश्व प्रयोजकम् | नावं निस्तीर्णकान्तारा आतुपराश्न चिकित्सकम्,ये छ: प्रायः सदा अपने पूर्व उपकारीका सम्मान नहीं करते हैं--शिक्षा समाप्त हो जानेपर शिष्य आचार्यका, विवाहित बेटे माताका, कामवासनाकी शान्ति हो जानेपर पुरुष स्त्रीका, कृतकार्य मनुष्य सहायकका, नदीकी दुर्गम धारा पार कर लेनेवाले पुरुष नावका तथा रोगी पुरुष रोग छूटनेके बाद वैद्यका
vidura uvāca | nārīṁ vigata-kāmās tu kṛtārthāś ca prayojakam | nāvaṁ nistīrṇa-kāntārā āturāśnī cikitsakam ||
ວິດູຣະກ່າວວ່າ: ເມື່ອຄວາມປາຖະໜາສົງບົບແລ້ວ ຄົນມັກບໍ່ໃຫ້ກຽດແມ່ຍິງ; ເມື່ອວຽກສຳເລັດແລ້ວ ກໍບໍ່ໃຫ້ກຽດຜູ້ຊ່ວຍ; ເມື່ອຂ້າມພົ້ນທາງອັນຕະລາຍແລ້ວ ກໍບໍ່ໃຫ້ກຽດເຮືອ; ແລະເມື່ອຫາຍປ່ວຍແລ້ວ ກໍບໍ່ໃຫ້ກຽດໝໍ. ດັ່ງນັ້ນ ຄົນຫຼາຍມັກລືມບຸນຄຸນ ບໍ່ຍົກຍ້ອງຜູ້ເຄີຍເຮັດດີໃຫ້ ເມື່ອຄວາມຈຳເປັນຜ່ານພົ້ນໄປແລ້ວ.
विदुर उवाच