अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
न भयाद् वासवस्यापि धर्म जहां महाव्रत । प्रसीद मा वा यद् वा ते कार्य तत् कुरु मा चिरम्,“महान् व्रतधारी राम! मैं इन्द्रके भी भयसे धर्मका त्याग नहीं कर सकता। आप प्रसन्न हों या न हों। आपको जो कुछ करना हो, शीघ्र कर डालिये
na bhayād vāsavasyāpi dharmaṁ jahāṁ mahāvrata | prasīda mā vā yad vā te kārya tat kuru mā ciram ||
«ໂອ ຣາມາ ຜູ້ຖືວຣະຕະອັນໃຫຍ່! ແມ່ນແຕ່ຢ້ານວາສະວະ (ອິນທຣາ) ຂ້ອຍກໍບໍ່ອາດລະທິ້ມທຳມະໄດ້. ຈະພໍໃຈຫຼືບໍ່ພໍໃຈກໍຕາມ—ສິ່ງໃດທີ່ເຈົ້າຈະເຮັດ ຈົ່ງເຮັດໃຫ້ໄວ ຢ່າຊ້າ»។
राम उवाच