हनिष्यामि सहामात्यं॑ त्वामद्येति पुन: पुन: । तब यह सुनकर परशुरामजीके नेत्रोंमें क्रोधका भाव व्याप्त हो गया और वे मुझसे इस प्रकार बोले--“नरश्रेष्ठ! तुम यदि मेरी यह बात नहीं मानोगे तो आज मैं मन्त्रियोंसहित तुम्हें मार डालूगा।” इस बातको उन्होंने बार-बार दुहराया
राम उवाच