भीष्मकृतः पाण्डवपक्ष-महारथ-प्रशंसा
Bhishma’s appraisal of Pandava-aligned chariot-warriors
अत-४-णका+ अष्ट षष्ट्यांधिकशततमोब& ध्याय: कौरवपक्षके रथियों और अतिरथियोंका वर्णन, कर्ण और भीष्मका रोषपूर्वक हक तथा दुर्योधनद्वारा उसका वारण भीष्म उवाच अचलो वृषकश्चैव सहितौ भ्रातरावुभौ । रथौ तव दुराधर्षो शत्रून् विध्वंसयिष्यत:,भीष्म कहते हैं--अचल और वृषक--ये साथ रहनेवाले दोनों भाई दुर्धर्ष रथी हैं, जो तुम्हारे शत्रुओंका विध्वंस कर डालेंगे
bhīṣma uvāca | acalo vṛṣakaś caiva sahitau bhrātarāv ubhau | rathau tava durādharṣau śatrūn vidhvaṃsayīṣyataḥ ||
ພີດສະມະ ກ່າວວ່າ: “ອະຈະລະ ແລະ ວຶສະກະ—ສອງພີ່ນ້ອງນີ້ຢູ່ຮ່ວມກັນບໍ່ເຄີຍແຍກ—ເປັນນັກຮົບລົດສົງຄາມຜູ້ຍາກຈະຕ້ານທານຢູ່ຝ່າຍເຈົ້າ. ພວກເຂົາຈະທໍາລາຍສັດຕູຂອງເຈົ້າໃຫ້ພິນາດ”
भीष्म उवाच