Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
अपना बछ। डे, द्विषष्टर्याधेकशततमो< ध्याय: पाण्डवपक्षकी ओरसे दुर्योधनको उसके संदेशका उत्तर संजय उवाच उलूकस्त्वर्जुनं भूयो यथोक्तं वाक्यमत्रवीत् | आशीविषमिव क्रुद्धं तुदन् वाक्यशलाकया,संजय कहते हैं--राजन्! उलूकने विषधर सर्पके समान क्रोधमें भरे हुए अर्जुनको अपने वाग्बाणोंसे और भी पीड़ा देते हुए दुर्योधनकी कही हुई सारी बातें कह सुनायीं इस प्रकार श्रीमह्याभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत उलूकदूताभिगमनपर्वमें श्रीकृष्ण आदिके वचनविषयक एक सौ बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १६२ ॥/ ऑपन-साजल बछ। अप ऋाल त्रिषष्टयाधिेकशततमो< ध्याय: पाँचों पाण्डवों, विराट, द्रुपद, शिखण्डी और धृष्टद्युम्नका संदेश लेकर उलूकका लौटना और उलूककी बात सुनकर दुर्योधनका सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश देना संजय उवाच दुर्योधनस्यथ तद् वाक्य निशम्य भरतर्षभ । नेत्राभ्यामतिताम्राभ्यां कैतव्यं समुदैक्षत
sañjaya uvāca | ulūkas tv arjunaṃ bhūyo yathoktaṃ vākyam abravīt | āśīviṣam iva kruddhaṃ tudan vākya-śalākayā |
ສັນຊະຍະກ່າວວ່າ: ໂອ ພະມະຫາກະສັດ, ອຸລູກະໄດ້ເຂົ້າໄປຫາອາຣຊຸນອີກຄັ້ງ ແລະເວົ້າຊ້ຳຕາມຂໍ້ຄວາມທີ່ຖືກສັ່ງໃຫ້ນຳໄປຢ່າງຖືກຕ້ອງ. ດ້ວຍຄຳເວົ້າຄົມກວ່າລູກດາບ, ລາວໄດ້ກະຕຸ້ນອາຣຊຸນ—ຜູ້ກຳລັງໂກດດຸດັ່ງງູພິດ—ໃຫ້ໄຟໂກດລຸກໂຊນ ແລະໃຫ້ຈິດໃຈແນ່ວແນ່ຕໍ່ສົງຄາມ.
संजय उवाच