उद्योगपर्व — अध्याय १४१: कर्ण–कृष्णसंवादः, उत्पात-स्वप्न-लक्षणानि
Karna–Krishna Dialogue: Omens and Dream-Signs
ध्रुवो जय: पाण्डवानामितीदं न संशय: कश्नन विद्यतेडत्र । जयध्वजो दृश्यते पाण्डवस्य समुच्छितो वानरराज उग्र:,पाण्डवोंकी विजय अवश्यम्भावी है। इस विषयमें कोई भी संशय नहीं है। पाण्डुनन्दन अर्जुनका वानरराज हनुमानसे उपलक्षित वह भयंकर विजयध्वज बहुत ऊँचा दिखायी देता है
ໄຊຊະນະຂອງພວກປານດະວະ ແນ່ນອນຢ່າງບໍ່ມີຂໍ້ສົງໄສ. ທຸງໄຊຂອງອັຣຊຸນ ບຸດແຫ່ງປານດຸ ທີ່ມີຮູບວານະຣາຊ ຮະນຸມານ ເປັນເຄື່ອງໝາຍ ຖືກຊູງຂຶ້ນສູງ ເຫັນແຈ້ງ ແລະນ່າຢ້ານຢ່າງຍິ່ງ.
संजय उवाच