उद्योगपर्व अध्याय १३३ — संजये मातृउपदेशः
Udyoga Parva Adhyaya 133 — A Mother’s Counsel to Saṃjaya
नेति चेद् ब्राह्मण ब्रूयां दीयेंत हृदयं मम । नहाहं न च मे भर्ता नेति ब्राह्मणमुक्तवान्,यदि किसी ब्राह्मणके माँगनेपर मैं उसकी अभीष्ट वस्तुके लिये “नाहीं” कह दूँगी तो उसी समय मेरा हृदय विदीर्ण हो जायगा। आजतक मैंने या मेरे पतिदेवने किसी ब्राह्मणसे नाहीं नहीं की है
neti ced brāhmaṇa brūyāṃ dīyeta hṛdayaṃ mama | na hy ahaṃ na ca me bhartā neti brāhmaṇam uktavān |
«ຖ້າພຣາຫມັນຜູ້ໃດມາຂໍ ແລ້ວຂ້ອຍກ່າວວ່າ ‘ບໍ່’ ໃນທັນທີນັ້ນ ໃຈຂອງຂ້ອຍຈະແຕກສະລາຍ. ເພາະບໍ່ເຄີຍມີທັງຂ້ອຍ ຫຼືສາມີຂອງຂ້ອຍ ທີ່ເຄີຍກ່າວ ‘ບໍ່’ ຕໍ່ພຣາຫມັນ»។
पुत्र उवाच