Adhyāya 17 — Gandhārī’s Vilāpa at Duryodhana’s Body (स्त्रीपर्व, अध्याय १७)
इत्येवमब्रुव॑ पूर्व नैनं शोचामि वै प्रभो । धृतराष्ट्र तु शोचामि कृपणं हतबान्धवम्,'प्रभो! यह बात मैंने पहले ही कह दी थी; इसलिये मुझे इस दुर्योधनके लिये शोक नहीं हो रहा है। मैं तो इन दीन राजा धृतराष्ट्रके लिये शोकमग्न हो रही हूँ, जिनके सारे भाई-बन्धु मार डाले गये
ໂອ ພຣະອົງ, ຂ້ອຍເຄີຍເວົ້າເລື່ອງນີ້ໄວ້ແຕ່ກ່ອນແລ້ວ; ດັ່ງນັ້ນຂ້ອຍບໍ່ໄດ້ໂສກເສົ້າເພື່ອດຸຣະໂຍທະນະ. ແຕ່ຂ້ອຍໂສກເສົ້າເພື່ອພຣະຣາຊາ ທຣິຕະຣາດສະຕຣະ ຜູ້ນ່າສົງສານ ຜູ້ສູນເສຍຍາດພີ່ນ້ອງທັງປວງ.
वैशम्पायन उवाच