उतथ्योपदेशः—राजधर्मः, दर्पनिग्रहः, प्रजारक्षणम्
Utathya’s Instruction: Royal Dharma, Restraint of Pride, Protection of Subjects
द्वावाददाते होकस्य द्वयो: सुबहवो5परे | कुमार्य: सम्प्रलुप्यन्ते तदाहुर्न॒ूपदूषणम्,जब दो मनुष्य मिलकर एककी वस्तु छीन लेते हैं, बहुत-से मिलकर दोको लूटते हैं तथा कुमारी कनन््याओंपर बलात्कार होने लगता है, उस समय इन सारे अपराधोंका कारण राजाको ही बताया जाता है
ເມື່ອຄົນສອງຄົນຮ່ວມກັນປົ້ນຊິງຂອງຄົນຜູ້ດຽວ, ແລະຄົນຫຼາຍຄົນຮ່ວມກັນປົ້ນສອງຄົນ, ແລະບັນດາສາວພຣະຈາຣິນຖືກລະເມີດ—ໃນເວລານັ້ນ ຜູ້ຄົນກ່າວວ່າ ອາຊະຍາເຫຼົ່ານັ້ນລ້ວນເປັນຄວາມດ່າງພ້ອຍຂອງກະສັດ.
उतथ्य उवाच