Adhyāya 90 — Protection of Livelihoods, Brahmanical Subsistence Norms, and Royal Oversight (राष्ट्रवृत्ति-राष्ट्रगुप्ति-उपदेशः)
संरक्ष्यान् पालयेद् राजा स राजा राजसत्तम: | ये केचित् तान् न रक्षन्ति तैर्थों नास्ति कश्चन,जो रक्षा करनेके योग्य पुरुषोंकी रक्षा करता है, वही राजा समस्त राजाओंमें शिरोमणि है। जो रक्षाके पात्र मनुष्योंकी रक्षा नहीं करते, उन राजाओंकी जगत्को कोई आवश्यकता नहीं है
ກະສັດຜູ້ປົກປ້ອງ ແລະ ອຸປະຖຳຜູ້ທີ່ຄວນໄດ້ຮັບການປົກປ້ອງ ນັ້ນແຫຼະແມ່ນກະສັດຜູ້ຍິ່ງໃຫຍ່ທີ່ສຸດໃນບັນດາກະສັດ. ກະສັດໃດບໍ່ປົກປ້ອງຜູ້ທີ່ຄວນປົກປ້ອງ ໂລກກໍບໍ່ມີຄວາມຈຳເປັນຕໍ່ກະສັດນັ້ນເລີຍ.
भीष्म उवाच