Vyavahāra-Śuddhi and Rājadharma: Clean Administration, Counsel, and Proportional Punishment
Chapter 86
किंतु संक्षेपत: शीलं प्रयत्नेनेह दुर्लभम् । वक्ष्यामि तु यथामात्यान् यादृशांश्व करिष्यसि,इसलिये तुम जिस भावसे जैसे मन्त्रियोंको संगठित करोगे अर्थात् करना चाहते हो, उनका दुर्लभ शील-स्वभाव जैसा होना चाहिये--इस बातको मैं प्रयत्नपूर्वक संक्षेपसे बताऊँगा
«ແຕ່ຄຸນຄວາມປະພຶດ (ສີນ) ອັນດີໃນໂລກນີ້ ແມ່ນຫາຍາກ ແມ່ນແຕ່ຈະພາກພຽນກໍຕາມ. ແຕ່ຂ້ອຍຈະກ່າວໃຫ້ຟັງໂດຍຫຍໍ້ ດ້ວຍຄວາມພາກພຽນວ່າ ເຈົ້າຄວນຈັດຕັ້ງອຳມາດຂອງເຈົ້າໃຫ້ເປັນແນວໃດ»។
भीष्म उवाच