Yogakṣema, Purohita, and the Mucukunda–Vaiśravaṇa Dialogue (योगक्षेम–पुरोहित–मुचुकुन्दवैश्रवणसंवादः)
मुचुकुन्द उवाच नाहं राज्यं भवददत्तं भोक्तुमिच्छामि पार्थिव । बाहुवीर्यार्जितं राज्यमश्नीयामिति कामये,मुचुकुन्द बोले--राजाधिराज! मैं आपके दिये हुए राज्यको नहीं भोगना चाहता। मेरी तो यही इच्छा है कि मैं अपने बाहुबलसे उपार्जित राज्यका उपभोग करूँ
ມຸຈຸກຸນດະ ກ່າວວ່າ: «ໂອ ພຣະຣາຊາ, ຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ປາຖະໜາຈະເສບສຸກກັບລາຊະອຳນາດທີ່ທ່ານມອບໃຫ້. ຂ້າພະເຈົ້າປາຖະໜາຈະເສບສຸກກັບອານາຈັກທີ່ໄດ້ມາດ້ວຍພະລັງແຂນຂອງຕົນ».
मुचुकुन्द उवाच