युधिष्ठिरस्य राज्याभिषेकः | Yudhiṣṭhira’s Royal Consecration
ऑपन-माजल बछ। सं: चत्वारिशो< ध्याय: युधिष्ठटिरका राज्याभिषेक वैशम्पायन उवाच ततः कुन्तीसुतो राजा गतमन्युर्गतज्वर: । काउ्चने प्राड्मुखो हृष्टो न््यषीदत् परमासने,वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! तदनन्तर कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर खेद और चिन्तासे रहित हो पूर्वकी ओर मुँह करके प्रसन्नतापूर्वक सुवर्णके सुन्दर सिंहासनपर विराजमान हुए
Vaiśampāyana uvāca: tataḥ Kuntīsuto rājā gatamanyur gatajvaraḥ | kāñcane prāṅmukho hṛṣṭo ny-aṣīdat paramāsane ||
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ຕໍ່ມາ ກະສັດຍຸທິສຖິຣະ ບຸດຂອງກຸນຕີ, ເມື່ອຄວາມໂກດໄດ້ຈາງຫາຍ ແລະຄວາມຮ້ອນຮົນແຫ່ງຄວາມທຸກໄດ້ສະຫງົບ, ກໍໄດ້ນັ່ງລົງດ້ວຍຄວາມປິຕິ ຫັນໜ້າໄປທາງທິດຕາເວັນອອກ ເທິງບັນລັງຄຳອັນງາມສະຫງ່າ.
वैशम्पायन उवाच