शान्ति पर्व (अध्याय 38): युधिष्ठिरस्य राजधर्म-जिज्ञासा तथा भीष्मोपसर्पण-प्रस्तावना | Shanti Parva Chapter 38: Yudhishthira’s Inquiry into Rajadharma and the Prelude to Approaching Bhishma
ततः पुण्याहघोषो<भूद् दिवं स्तब्ध्वेव भारत । सुहृदां प्रीतिजनन: पुण्य: श्रुतिसुखावह:,भारत! इसके बाद पुण्याहवाचनका गम्भीर घोष होने लगा, जो आकाशको स्तब्ध-सा किये देता था। वह पवित्र शब्द कानोंको सुख देनेवाला तथा सुहृदोंको प्रसन्नता प्रदान करनेवाला था
ໂອ ພາຣະຕະ! ຕໍ່ຈາກນັ້ນ ສຽງປະກາດ “ປຸນຍາຫະ” ອັນສັກສິດໄດ້ດັງຂຶ້ນຢ່າງກັງວານ ດັ່ງຈະເຮັດໃຫ້ຟ້າສະຫງົບງຽບ. ຖ້ອຍສຽງອັນບໍລິສຸດນັ້ນ ຊື່ນຫູ ແລະກໍ່ໃຫ້ເກີດຄວາມປິຕິໃນດວງໃຈຂອງມິດສະຫາຍທັງຫຼາຍ.
वैशम्पायन उवाच