Prāyaścitta-vidhāna: Tapas, Dāna, Vrata, and Proportional Expiation (प्रायश्चित्तविधानम्)
दश वा वेदशास्त्रज्ञास्त्रयो वा धर्मपाठका: । यद् ब्रूयु: कार्य उत्पन्ने स धर्मो धर्मसंशये,“यदि प्रायश्चित्तकी आवश्यकता पड़ जाय और धर्मके निर्णयमें संदेह उपस्थित हो जाय तो वेद और धर्म-शास्त्रको जाननेवाले दस अथवा निरन्तर धर्मका विचार करनेवाले तीन ब्राह्मण उस प्रश्नपर विचार करके जो कुछ कहें, उसे ही धर्म मानना चाहिये
daśa vā vedaśāstrajñās trayo vā dharmapāṭhakāḥ | yad brūyuḥ kārya utpanne sa dharmo dharmasaṃśaye ||
ພຣະວະຍາສະ ກ່າວວ່າ: ເມື່ອມີກໍລະນີເກີດຂຶ້ນ ແລະເກີດຄວາມສົງໄສວ່າສິ່ງໃດແມ່ນທຳມະທີ່ແທ້—ໂດຍສະເພາະໃນເລື່ອງທີ່ຕ້ອງການພິທີຊຳລະບາບ—ຄວນຖືວ່າເປັນທຳມະ ຕາມຂໍ້ສະຫຼຸບທີ່ໄດ້ຈາກການພິຈາລະນາຂອງພຣາຫມັນ 10 ຄົນຜູ້ຮູ້ເວດແລະສາດສະຕຣາ ຫຼື 3 ຄົນຜູ້ສຶກສາແລະກວດກາທຳມະຢູ່ເປັນນິດ.
व्यास उवाच