धर्मद्वारबहुत्वविमर्शः — Reflection on the Many ‘Doors’ of Dharma (Śānti-parva 342)
सर्वज्ञा: केशवं तस्मान्मामाहुर्द्धिजसत्तमा: । जगत्को तपानेवाले सूर्यकी तथा अग्नि और चन्द्रमाकी जो किरणें प्रकाशित होती हैं, वे सब मेरा केश कहलाती हैं। उस केशसे युक्त होनेके कारण सर्वज्ञ द्विजश्रेष्ठ मुझे "केशव" कहते हैं ।। ४८ $ || एवं हि वरदं नाम केशवेति ममार्जुन | देवानामथ सर्वेषामृषीणां च महात्मनाम्
arjuna uvāca | evaṃ hi varadaṃ nāma keśaveti mamārjuna | devānām atha sarveṣām ṛṣīṇāṃ ca mahātmanām ||
«ດັ່ງນັ້ນແຫຼະ ໂອ ອາຣະຈຸນ—ນາມ ‘ເກສະວະ’ ຂອງຂ້າ ໄດ້ກາຍເປັນນາມອັນໃຫ້ພອນແທ້ ເພາະຖືກຮັບຮູ້ໂດຍເທວະທັງປວງ ແລະໂດຍບັນດາລະສີຜູ້ມີຈິດໃຫຍ່»។
अर्जुन उवाच