अध्याय ३३१: नारायणकथा-प्रशंसा तथा नारदस्य श्वेतद्वीप-निवृत्ति एवं बदरी-आगमनम् | Chapter 331: Praise of the Nārāyaṇa Narrative; Nārada’s Return from Śvetadvīpa and Arrival at Badarī
दुःखोपघाते शारीरे मानसे चाप्युपस्थिते | यस्मिन् न शक्यते कर्तु यलस्तन्नानुचिन्तयेत्,यदि कोई शारीरिक या मानसिक दुःख उपस्थित हो जाय और उसे दूर करनेके लिये कोई यत्न किया जा सके अथवा किया हुआ यत्न काम न दे सके तो उसके लिये चिन्ता नहीं करनी चाहिये
duḥkhopaghāte śārīre mānase cāpy upasthite | yasmin na śakyate kartuṃ yatnas tan nānucintayet ||
ນາຣະດະກ່າວວ່າ: ເມື່ອຄວາມທຸກທາງກາຍ ຫຼື ທາງໃຈເກີດຂຶ້ນ ບໍ່ຄວນຫມົກມຸ່ນຄິດຫຼາຍຢູ່ກັບມັນ. ຖ້າເປັນສິ່ງທີ່ພະຍາຍາມແກ້ໄດ້ ກໍໃຫ້ລົງມື; ແລະຖ້າພະຍາຍາມແລ້ວຍັງແກ້ບໍ່ໄດ້ ກໍຢ່າຈົມຢູ່ໃນຄວາມກັງວົນຄິດຊ້ຳຊາກ.
नारद उवाच