देवतापितृप्रश्नः — Nārada at Badarīāśrama: the ultimate referent of daiva and pitṛ worship
हिरण्यरत्नसंचया: शुभाशुभेन संचिता: । न तस्य देहसंक्षये भवन्ति कार्यसाधका:,मनुष्यके द्वारा अच्छे-बुरे सभी तरहके कर्म करके जो सुवर्ण और रत्नोंके ढेर इकट्ठे किये जाते हैं, वे भी उस मनुष्यके शरीरका नाश होनेपर उसके किसी काम नहीं आते हैं (क्योंकि वे सब यहीं रह जाते हैं)
ວຽສະກ່າວວ່າ: «ກອງຄຳ ແລະກອງແກ້ວມະນີທີ່ມະນຸດສະສົມໄວ້ ດ້ວຍການກະທຳທັງດີແລະຊົ່ວ ເມື່ອຮ່າງກາຍສິ້ນສະລາຍແລ້ວ ກໍບໍ່ອາດຊ່ວຍໃຫ້ສຳເລັດສິ່ງໃດແກ່ເຂົາໄດ້ ເພາະມັນທັງໝົດຖືກປະໄວ້ຢູ່ນີ້».
व्यास उवाच