Śuka’s Nirveda: Vyāsa’s Admonition on Dharma, Impermanence, and ‘Imperishable Wealth’ (अक्षय-धन)
ऋषिरुवाच मनसोअप्रतिकूलानि प्रेत्य चेह च वाउ्छसि । भूतानां प्रतिकूलेभ्यो निवर्तस्व यतेन्द्रिय:,ऋषि बोले--राजकुमार! यदि तुम इस लोक और परलोकमें अपने मनके अनुकूल वस्तुएँ पाना चाहते हो तो अपनी इन्द्रियोंको संयममें रखकर समस्त प्राणियोंके प्रतिकूल आचरणोंसे दूर हट जाओ
ິສີກ່າວວ່າ: “ໂອ ເຈົ້າຊາຍ, ຖ້າເຈົ້າປາດຖະໜາສິ່ງທີ່ບໍ່ຂັດກັບໃຈ—ທັງໃນໂລກນີ້ ແລະຫຼັງຄວາມຕາຍ—ຈົ່ງສໍາລວມອິນທຣີ ແລະຖອນຕົນອອກຈາກການປະພຶດທີ່ເປັນປະປັກຕໍ່ສັດທັງປວງ.”
भीष्म उवाच